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Friday, 1 April 2016

aankhon ki samasya, आँखों में होने वाली खुजली से छुटकारा कैसे पाए

गर आपकी आँखों में पिछले कुछ समय से जलन होने लगी है तो आपका ध्यान किसी भी काम में नहीं लगता है  और सारा ध्यान उस जलन या खुजली में ही लगा रहता है।आपके कई यत्न करने के बाद भी आप को इस जलन से राहत नही मिलती।इसका मुख्य कारण प्रदूषण,एलर्जी हो सकते है। आँखों में जलन होने पर कुछ घरेलु चीजों का इस्तेमाल करके हम इस जलन से छुटकारा पा सकते है।


बर्फ - बर्फ के टुकडे़ को किसी कॉटन के कपड़े में बांध कर आंखों के ऊपर रखने से आंखों को आराम मिलता है।

खीरा - खीरे को पतला -पतला काट कर फ़रिज में रख दें और इसको ठण्डा होने पर आंखों पर रखने से आंखों के काले घेरों के साथ ,आपकी आँखों की खुजली भी ठीक हो जाएगी ।


गुलाब जल - गुलाब जल न सिर्फ़ ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मदद करता है ब्लकि यें आंखों के लिए भी बढ़िया होता है।आंखों में जलन होने पर आंखों में कुछ बूंदे गुलाब जल की डालने से आराम मिलता है।रूई को गुलाब जल में भिगो कर  आंखों पर रखने से आराम मिलता है।

कच्चा आलू - कच्चा आलू भी बहुत लाभदायक होता है। पहले आलू को पतला -पतला काट लें फिर इसे आंखों पर रखने से आंखों को आराम मिलेंगा।

ठंडा दूध - ठंडा दूध भी जलन को कम करने में मददगार साबित हुआ है।रूई को ठंडे दूध में भिगोकर आंखों के ऊपर रखने से आराम मिलता है।

सब्ज़ी का जूस - कच्ची सब्जियों का जूस भी आपके लिए बढ़िया साबित हो सकता है। 2गाजर और एक कप पालक का जूस निकाल कर पी लें। दिन में 2बार या 3बार सब्जियों का जूस पीने के साथ आँखों को आराम मिलता है।



एलोवेरा - एलोवेरा के भी कई लाभ होते हैं। एलोवेरा हमारी खूबसूरती को बढ़ाने के साथ- साथ इसके ओर भी कई फायदे है। एलोवेरा के पत्तों से ज़ैल निकालकर और उस में शहद मिलाकर इस पेस्ट को आँखें को बंद करके आँखों पर लगाने से आराम मिलता है।आंखों की जलन भी कम होने लगती है।

Diabetes Ke Gharelu Upchar, डायबिटीज मधुमेह के घरेलू उपचार

बदलता परिवेश और रहन-सहन शहर में मधुमेह के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा कर रहा है। खान-पान पर नियंत्रण न होना भी इसके लिए जिम्मेदार है। दीपावली के बाद विभिन्न अस्पतालों में जांच के लिए आने वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। समाज में तेजी से पांव पसारते इस बीमारी का घरेलू उपचार भी कारगर है।

मधुमेह में जामुन राम बाण है। आयुर्वेद में भी किसी दवा का इसके बगैर निर्माण नहीं होता है। उन्होंने बताया कि मधुमेह के मरीजों को जामुन के फल के साथ सुबह तुलसी की पांच पली और काली मिर्च का सेवन करना चाहिए। यह बेहद कारगर साबित होगा। आयुर्वेद में मधुमेह नाशक औषधि में जामुन और कैथ का विशेष उल्लेख है। यह दोनों मधुमेह को नष्ट कर यकृत को पेन्क्रियाज को इंसुलिन बनाने में सहायता प्रदान करती हैं। मधुमेह के रोगियों को इनका सेवन तत्काल और बड़ी सहायता देने में सहायक हैं।

लक्षण

मधुमेह होने के कई लक्षण रोगी को स्वयं अनुभव होते हैं।

1. बार-बार रात के समय पेशाब आते रहना।
2. आंखों से धुंधला दिखना।
3. थकान और कमजोरी महसूस करना।
4. पैरों का सुन्न होना।
5. प्यास अधिक लगना।
6. घाव भरने में समय लगना।
7. हमेशा भूख महसूस करना।
8. वजन कम होना।
9. त्वचा में संRमण होना।
10. मूत्र बार-बार एवं अधिक मात्रा में होना तथा मूत्र त्यागने के स्थान पर मूत्र की मिठास के कारण चीटियां लगना।
11. शरीर में फोड़े-फुंसी होने पर उसका घाव जल्दी न भरना।
12. शरीर पर फोड़े-फुंसियां बार-बार निकलना।
13. शरीर में निरन्तर खुजली रहना एवं दूरस्थ अंगों का सुन्न पड़ना

मधुमेह या डायबिटीज का घरेलु उपचार

तुलसी के पत्ते: तुलसी के पत्तों में ऐन्टीआक्सिडन्ट और ज़रूरी तेल होते हैं जो इजिनॉल, मेथिल इजिनॉल और कैरियोफ़ैलिन बनता है। ये सारे तत्व मिलकर इन्सुलिन जमा करने वाली और छोड़ने वाली कोशिकाओं को ठीक से काम करने में मदद करते हैं। इससे इन्सुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है। एक और फ़ायदा ये है कि पत्तियों में मौजूद ऐन्टीआक्सिडन्ट  आक्सिडेटिव स्ट्रेस संबंधी कुप्रभावों को दूर करते हैं।

नुस्खा: शुगर लेवल को कम करने के लिए दो से तीन तुलसी के पत्ते खाली पेट लें, या एक टेबलस्पून तुलसी के पत्ते का जूस लें।

पटसन के बीज: इनमें फाइबर सामग्री बहुल मात्रा में पाई जाती है जो पाचन में तो मदद करते ही हैं साथ ही फैट और शुगर के अवशोषण में भी सहायक होते हैं। पटसन के बीज खाने से मधुमेह से ग्रसित मरीजों में शुगर की मात्रा 28 प्रतिशततक कम होती है।

नीलबदरी के पत्ते: मधुमेह को रोकने के लिए इसका इस्तेमाल आयुर्वेद में सदियों से हो रहा है. जर्नल ऑफ़ न्यूट्रीशन ने कहा है कि इसकी पत्तियों में एंथोसियानीडीनस भारी मात्रा में मौजूद होते हैं जो चयापचय की प्रक्रिया और ग्लूकोज़ को शरीरके विभिन्न भागों में पहुंचाने की प्रक्रिया को समृद्ध करता है। अपने इस ख़ास गुण के कारण नीलबदरी के पत्ते ब्लड शुगरलेवल को कम करने में काफी कारगर होते हैं।

दालचीनी: ये इन्सुलिन की संवेदनशीलता को सुधारने के साथ-साथ ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को भी कम करता है। अगर सिर्फ आधी चम्मच दालचीनी रोज़ ली जाए तो इन्सुलिन की संवेदनशीलता को सुधारा और अपने वज़न को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे ह्रदय संबंधी रोगों का खतरा कम हो जाता है।

नुस्खा: लगभग एक महीने के लिए अपने रोज़ के आहार में एक ग्राम दालचीनी का इस्तेमाल करें, इससे ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद मिलेगी।

ग्रीन टी: ग्रीन टी में पॉलीफिनोल्स होते हैं जो एक मज़बूत एंटी-ऑक्सीडेंट और हाइपो-ग्लाइसेमिक तत्व हैं, इससे ब्लड शुगर को रिलीज़ करने में मदद मिलाती है और शरीर इन्सुलिन का सही तरह से इस्तेमाल कर पाता है।

सहजन के पत्ते: इसे मोरिंगा भी कहते हैं, इसके पत्तों में इसमें दूध की तुलना में चार गुना कैलशियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। मधुमेह के मामलों में इन पत्तों के सेवन से भोजन के पाचन और रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है।

इसबगोल: पानी में मिलने के बाद इसबगोल की भूसी ‘जेल’ जैसा तत्व बनाती है जिसका सेवन ब्लड ग्लूकोज़ के अवशोषण और भोजन के पाचन को सुगम बनाता है। ये अल्सर और एसिडिटी से भी बचाता है।

करेला: करेले में इन्सुलिन-पोलिपेपटाइड होता है, ये एक ऐसा बायो-कैमिकल तत्व है जो ब्लड-शुगर को कम करने में उपयोगी है।

नुस्खा : हर हफ्ते कम से कम एक बार करेले की सब्जी या कढी ज़रूर लें. अगर आप जल्द असर चाहते हैं तो तीन दिनमें एक बार खाली पेट करेले का जूस लें।

नीम: देश में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले नीम के पत्ते स्वाद में कडवे होते हैं पर इनमें बहुत सी खासियतें हैं।  नीम इन्सुलिन रिसेप्टर सेंसिटिविटी बढाने के साथ साथ शिराओं व धमनियों में रक्त प्रवाह को ठीक करता है और हाइपो ग्लाय्केमिक ड्रग्स पर निर्भर होने से बचाता है।

नुस्खा: बेहतर नतीजों के लिए नीम के पत्तों का जूस रोज़ सुबह खाली पेट लें।

काला जामुन: ये ब्लड-शुगर को कम करने में मदद करता है और ह्रदय संबंधी बीमारियों से शरीर को दूर रखता है।

गले की खराश के उपाय, gale ki kharash ke upay



गले में खराश या दर्द का सीधा कनेक्शन सर्दी से हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर के पास भागने से बेहतर होगा कुछ आसान उपाय अपनाएं।

नमक के पानी से गरारे

दुनिया भर में किए गए कई शोध और अध्ययन यह बात साबित कर चुके हैं कि गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे करने से गले में दर्द और सूजन से राहत मिलती है। डॉक्टर भी अक्सर इस समस्या में यही सलाह देते हैं।


कफ सिरप भी देता है आराम


बेशक आपको खांसी की समस्या न हो, लेकिन गले में दर्द या खराश होने पर भी कफ सिरप काफी असरकारक होते हैं। यह ध्यान रखें कि दफ्तर जाते समय या दिन के समय इस उपाय को न आजमाएं, क्योंकि कफ सिरप के सेवन से आराम मिलने के साथ-साथ नींद भी आने लगती है।


पेय पदार्थ जरूरी हैं

जानकार मानते हैं कि इस समस्या के दौरान यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि शरीर में पानी की कमी न हो। पानी की पर्याप्त मात्रा होने से म्यूकस मेम्ब्रेन में नमी बनी रहती है, जो इसे बैक्टीरिया से लड़ने में सक्षम बनाती है।



पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के अलावा, फलों का जूस या सूप का सेवन भी किया जा सकता है। इसके साथ ही हर्बल-टी का सेवन भी कारगर हो सकता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट दवा की तरह काम करते हैं और गले को जल्द राहत पहुंचाते हैं।


मुंह सूखने न दें


गले में इंफेक्शन के दौरान कुछ भी खाना-पीना मुश्किल होता है। ऐसे में विक्स या स्ट्रेपसिल्स जैसी जिंजर फ्लेवर वाली मेडिकेटेड गोलियां चूसना भी फायदेमंद होता है। इससे आपके मुंह में सलाइवा बनता रहता है, जो गले को आराम देता है।

गले में खराश के अन्य उपाय



रात को सोते समय दूध और आधा पानी मिलाकर पिएँ।

* मांस, रूखा भोजन, सुपारी, खटाई, मछली, उड़द इन चीजों से परहेज करें।

* 1 कप पानी में 4 - 5 कालीमिर्च एवं तुलसी की 5 पत्तियों को उबालकर काढ़ा बना लें और इस काढ़े को पी जाएँ।

* साधारण भोजन करें।
* गले में खराश होने पर गुनगुना पानी पिएँ।

* गुनगुने पानी में सिरका डालकर गरारे करने से गले का रोग दूर हो सकता है।


* पालक के पत्तों को पीसकर इसकी पट्टी बनाकर गले में बाँधे। इस पट्टी को 15-20 मिनट के बाद खोल दें।
* धनिए के दानों को पीसकर उसमें गुलाब जल मिलाएँ और गले पर चंदन लगाएँ।
* कालीमिर्च को 2 बादाम के साथ पीसकर सेवन करने से गले के रोग दूर हो सकते हैं।

* कालीमिर्च को पीसकर घी या बताशे के साथ चाटें।